हाथो की उंगलियो के बीच में सिगरेट फसाते हुए होठ से सुलगा कर वे बोला - ये कोई सब्ज़ी मंडी नही है भाई, बढ़े बेकार आदमी हो .. मैं उस समय आमरण अनशन पर बैठे असीम और आलोक जी के साथ जंतर मंतर पर मौजूद था.तीन दिन की अनुमति मिलने के बाद 2 से 5 तक का धूप से बचने का एकमात्र उपाय टेंट भी हटने वाला था.. पर्मिशन के अनुसार 3 दिन पूरे हो चुके थे,टेंट मालिक पर्ची निकाल 3 दिन के 5000 रुपय माँगने लगता है जो सुन के हम बोहचके रह जाते है..पैसे वाजीफ लीजिए कहने की बात पर वो .. आलू बेनगन की तरह हमारे चेहरे पर सब्ज़ी मंडी आदि जैसी टिपणी दाग गया.खैर कुछ देर आंदोलन रणनीति को लेकर आत्मा मंथन चला फ़ैसला हुआ के हम इसे जारी रखेंगे.क्योकि,जिस मकसद के लिए सेव यूअर वाय्स :आ मूवमेंट अगेन्स्ट वेब सेन्सरशिप लड़ रहा है वे मसला है इंटरनेट का जहा आप और हम अपने विचारो को पंख प्रदान करते है.
मुद्दा है इन पंखों के काटे जाने का और उसका बचाव करने का .. !
आगे की बातें मैं आपके सामने प्रस्तुत करू उस से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातो पर गौर कीजिए-
आई टी एक्ट 2011 की इंटेरमीडिएटरी गाइड्लाइन्स को निरस्त करने का एक लौटा मौका बचता है अब जब केरल के एक सांसद राज्यसभा में एनलमेंट मोशन लाने जा रहे है इसके बाद आईटी एक्ट 2011 में सिर्फ़ संशोधन होना संभव होगा वे कितना कठिन है यह बात आप समझ सकते है जब लगभग 90 से 99 विधेयक संसद में पारित होने के लिए अरसे से रुके रहे. आई टी एक्ट 2011 समझने में जितना पेचीदा है उसको जानना भी आप के लिए उतना ही अहम है क्योकि यह वे एक्ट है जिसके अनुसार आप के खिलाफ एक शिकायत भर से आप की वेबसाइट ,कॉंटेंट,ब्लॉग,(मेरा भी हो जाए तो समझ जाइएएगा)आदि सब ब्लॉक हो सकता है.
आप को इस बाबत लीगल नोटिफिकेशन भी नही दी जाएगी और आप की अभिव्यक्ति का कत्ल हो जाएगा. महत्पूर्ण बात यह भी है के किस ने आपके खिलाफ कंप्लेंट की इसकी जानकारी भी आप को नही दी जाएगी,ना ही आप अपना पक्ष रख सकेंगे और 36 घंटे के भीतर आपकी निजता पर नीचता का कार्य आसानी से सफल हो जाएगा.जब आप कोई ग़लत कार्य करते है तब भी आपको अपना पक्ष रखने का मौका प्रदान किया जाता है चाहे आप कोर्ट में लड़ रहे हो,या पुलिस थाने में,यहा आपके उपर कारवाई की जाएगी उसके बाद आप के पास एक उपाय बचता है के आप अपनी वेबसाइट ब्लॉग या फेसबुक अकाउंट की खातिर कोर्ट तक जाए ?
क्या आप ऐसा करेंगे .. बहुतरे लोग ऐसे है जिन्हे फेसबुक पर करीना ऐश्वरिया की तस्वीर उपलोड करना या सत्यमेव जयते करना भी आता है पर इस मामले की तनिक भर भी जानकारी नही है.भागम भाग की इस संघर्षकारी ज़िंदगी में इंसान हर वक़्त दो जून की रोटी के लिए व्यस्त रहता है .. यह बात लाजिम भी है ..
दफ़्तर छोड़ कोर्ट कचेरी जाएँगे रोज तो बीवी बच्चो को चूयिंग गम खिलाने से काम नही चलेगा .. पर बात है के जब अभी हमारे पास एक अवसर बचा है अपनी अभिव्यक्ति को ज़िंदा रखने का तब हम क्यो 1 दिन निकाल इस शुभ कार्य में खुद की भूमिका नही निभाते .. यह बात स्वीकृत है के इंटरनेट के महासागर जैसी अद्भुत जगह पर कुछ आसामाजिक तत्व है जो कई दफ़ा अंडसंद कार्य कर लोगो की भावनाओ को ठेस पहुचाने का प्रयास करते है .. पर सवाल है के एक कॉंटेंट आपतिजनक है ये कौन तय करेगा.आप मैं या वे क्राइम ब्रांच के अधिकारी जिन्होने असीम त्रिवेदी की कार्टूनिस्ट अगेन्स्ट करप्षन साइट एक वकील की शिकायत पर ब्लॉक कर दी थी.आप भी मेरे खिलाफ कंप्लेंट कर मेरे ब्लॉग को ब्लॉक करवा सकते है उसके पैदा होने के साथ उसका अंतिम संस्कार करवा सकते है और क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्टून बनाना .. लिखना भी आपतिजनक है.
अन्ना हज़ारे का अगस्त का रामलीला आंदोलन हो या फिर निर्मल बाबा पर इंटरनेट पर ओलों सी गिरती प्रतिक्रियाएं सब में एक आम आदमी अपनी बात खुले मंच पर रख पाया.. जो प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टेम मीटर के आधार पर यह तय करता है के हम क्या देखेंगे और क्या नही .. यहा उस पेमाने को हटा कर सरोकार से जुड़ी बात हुई आम जनता का सरोकार .. फिर सेव यूअर वाय्स की टीम यह कतई नही कहती के आईटी एक्ट को ख़तम ही कर दिया जाए वह माँग कर रहे है ऐसे क़ानून की जो इंटरनेट को और भी शक्ति प्रदान करे उसे और मजबूत करे.. जिस तरह का मौजूदा क़ानून अभी है वो इंटरनेट के बढ़ते सूरज को और बढ़ने ना दे कर उसे डूबने पर आमादा रहेगा .. गांव कस्बो तक मोबाइल क्रांति अपनी पहुच स्थापित कर रही है पर इंटरनेट का क्या .. हम कैसे आधुनिकीकरण की बात कर पिछड़ापन अपनाकर क़ानूनी करवाई का हवाला दे सकते है.क़ानून हो के कम से कम जानकारी दी जाए के किस ने आपके खिलाफ और किस चीज़ को लेकर शिकायत की.. अपनी बात रखने का मौका दिया जाए.. हो सकता है के कॉंटेंट सत्य में कुछ अधिक ही आपतिजनक हो ऐसे में मामला पूरा होने तक वे साइटो पर पढ़ा रहे तो ये ठीक बात नही पर कुछ दिन की मोहलत तो दी जाए के आप इस या उस चीज़ को लेकर क्या पक्ष रखना चाहेंगे और यदि उसे पेज को ब्लॉग को हटा भी दिया जाए तो कम से कम उसके सही साबित होने के बाद उसे वापस डाला जाए..किंतु यहा स्थिति इतनी दुर्भाग्यपूर्ण है के आपको कुछ जानकरी ही नही दी जाएगी तो आप क्या कहेंगे और क्या सुनेंगे.आज असीम और आलोक जी के अनशन को 7 वा दिन है .. 5 दिन के बाद से उन्होने जल भी त्याग दिया है .. इसी वजह से निर्जलीकरण से तबीयत बिगड़ी और दिल्ली पुलिस ने उन्हे आरएमएल अस्पताल में भरती करवा दिया .. फिर भी दोनो युवा अनशन वही से जारी रखते हुए हमारा इंतजार कर रहे है .. क्या हम इतने लालची और पाखंडी है के समझ ना पाए क्या सही है और क्या ग़लत ना समझने का प्रयास करे. कम से कम रूचि तो लीजिए और चलिए अपने ब्लॉग फेसबुक पर उनके बारे में लिखे और अपनी अभिव्यक्ति की लड़ाई में खुद भी शामिल हो..|

बहुत अच्छे भाई .. ब्लॉग का शुभ आरंभ इस तरह किया
ReplyDeleteयह देख दिल को सुकून मिला,तुम ऐसे ही लगे रहो मेी तुम्हारे साथ हू और लिखा बहुत बेहतरीन है भावनाओ का और सचाई का गंभीर मिक्षण.
आपका प्रयास सराहनीय है| आशा करते है इस लेख को पढ़कर कुछ लोग जंतर-मंतर ज़रूर जाएँगे.......वैसे आपको इक बात बता दु कि ना हम पाखंडी है और ना ही लालची..... ...........हम बस मतलबी है|
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